सांप की खाल
इसकेली नाम का एक जंगल मे सांप रहता था Moral Stories In Hindi For वो बहुत शरारती था वो अपने पापा के साथ रहता था इसकेली बस बहुत खेल लिए चलो जल्दी आ जाओ ठीक हैं पापा एक दिन वो बहुत बेचैन होने
लगा तुम इतने बेचैन क्यो हो बेटा इसकेली बोला पता नहीं पापा मेरे शरीर मे बहुत खुजली हो रहीं हैं इसकेली तुम साफ़ सफ़ाई तो रखते हों ना इसकेली बोला हां पापा
मैं दिन में दो बार मिट्टी रगड़ ता हु अगले दिन इसकेली की बेचैनी और बढ़ गई वो अपने पापा से बोला पापा कुछ समझ नहीं आ रहा हैं मुझे समझ आ रहा हैं अब तुम
बड़े हो रहे हो इसकेली बोला अब ये सहन नहीं हो रहा हैं तब एक दिन बहुत अज़ीब घटना हुई पापा पापा ये देखों क्या हो रहा हैं अब ये दर्द और बड़ रहा हैं ये देखो गले पे
ये देख कर इसकेली के पापा कुछ ना बोले इसकेली बोला मेरा दर्द बड़ रहा हैं आपको बिल्कुल चिंता नही हो रहीं इसकेली के पापा बोले वो देखो वो पत्तर दिख रहा हैं अपनी
गर्दन को बहाँ जाके रगड़ो इसकेली बोला क्या फिर उसके पापा बोले जैसा कहता हूं वैसा करो इसकेली बोला आप ऐसा करने के लिए क्यों कह रहे हैं
जिससे के दर्द और होगा इसकेली बेटा जैसा जैसा कह रहा हु वेसा करो अभी जाओ इसकेली ने अपना शरीर उस पत्तर से रगड़ा तो और इसकेली ठीक हो गया ये देख कर
इसकेली बोला मैं अब ठीक हो गया पापा बिल्कुल नए सांप जैसा हो गया इसकेली के पापा बोले बेटे ऐसा ही होता हैं जब हम सांप बड़े होते हैं तो ये सब प्रक्रिया हैं हम साँपो
की बड़े होने की हम अपनी पुरानी चमड़ी से ढके होते हैं इस दर्द को सहन कर के कीटाणुओं से
भरी चमड़ी छोड़ कर नई चमड़ी में आ जाते हैं चलो अब समझें अब तुम बिल्कुल नए साँप लग रहे हो इसकेली बोला हैं पापा अब मैं समझ गया मैं दोस्तों को जाके नई चमड़ी दिखाऊँगा....
शिक्षा ; - तो समझे बच्चों संघर्ष हमेशा कुछ नया लेकर आत हैं
इसकेली नाम का एक जंगल मे सांप रहता था Moral Stories In Hindi For वो बहुत शरारती था वो अपने पापा के साथ रहता था इसकेली बस बहुत खेल लिए चलो जल्दी आ जाओ ठीक हैं पापा एक दिन वो बहुत बेचैन होने
लगा तुम इतने बेचैन क्यो हो बेटा इसकेली बोला पता नहीं पापा मेरे शरीर मे बहुत खुजली हो रहीं हैं इसकेली तुम साफ़ सफ़ाई तो रखते हों ना इसकेली बोला हां पापा
मैं दिन में दो बार मिट्टी रगड़ ता हु अगले दिन इसकेली की बेचैनी और बढ़ गई वो अपने पापा से बोला पापा कुछ समझ नहीं आ रहा हैं मुझे समझ आ रहा हैं अब तुम
बड़े हो रहे हो इसकेली बोला अब ये सहन नहीं हो रहा हैं तब एक दिन बहुत अज़ीब घटना हुई पापा पापा ये देखों क्या हो रहा हैं अब ये दर्द और बड़ रहा हैं ये देखो गले पे
ये देख कर इसकेली के पापा कुछ ना बोले इसकेली बोला मेरा दर्द बड़ रहा हैं आपको बिल्कुल चिंता नही हो रहीं इसकेली के पापा बोले वो देखो वो पत्तर दिख रहा हैं अपनी
गर्दन को बहाँ जाके रगड़ो इसकेली बोला क्या फिर उसके पापा बोले जैसा कहता हूं वैसा करो इसकेली बोला आप ऐसा करने के लिए क्यों कह रहे हैं
जिससे के दर्द और होगा इसकेली बेटा जैसा जैसा कह रहा हु वेसा करो अभी जाओ इसकेली ने अपना शरीर उस पत्तर से रगड़ा तो और इसकेली ठीक हो गया ये देख कर
इसकेली बोला मैं अब ठीक हो गया पापा बिल्कुल नए सांप जैसा हो गया इसकेली के पापा बोले बेटे ऐसा ही होता हैं जब हम सांप बड़े होते हैं तो ये सब प्रक्रिया हैं हम साँपो
की बड़े होने की हम अपनी पुरानी चमड़ी से ढके होते हैं इस दर्द को सहन कर के कीटाणुओं से
भरी चमड़ी छोड़ कर नई चमड़ी में आ जाते हैं चलो अब समझें अब तुम बिल्कुल नए साँप लग रहे हो इसकेली बोला हैं पापा अब मैं समझ गया मैं दोस्तों को जाके नई चमड़ी दिखाऊँगा....
शिक्षा ; - तो समझे बच्चों संघर्ष हमेशा कुछ नया लेकर आत हैं
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